जौनपुर में मोबाइल गेम के विवाद में बीएससी छात्रा ने खुद का गला काटा, डॉक्टर की त्वरित सर्जरी से बची जान
Jaunpur News : यूपी के जनपद जौनपुर में गेम खेलने के लिए मोबाइल न मिलने पर एक बीएससी की छात्रा ने धारदार से खुद का गला रेत डाला। श्वांस एवं ख...
छोटी बहन से मोबाइल को लेकर हुआ विवाद
बताया जाता है कि बक्शा थाना क्षेत्र के ग्रामसभा लखऊवां (खरौना) अपने नाना के घर रहकर मोहम्मद हसन कालेज से बीएससी प्रथम वर्ष की पढ़ाई कर रही 19 वर्षीय खुशबू की बीते शुक्रवार की शाम मोबाइल पर गेम खेलने को लेकर छोटी बहन से बहस हो गयी। घटना के समय घर पर सिर्फ दोनों बहनें ही मौजूद थी। जब छोटी बहन ने मोबाइल देने से इंकार कर दिया तो वह तैश में आकर दूसरे कमरे में चली गयी और पास में रखे सब्जी काटने वाले चाकू से अपना ही गर्दन रेत दिया।
खून से लथपथ हालत में मिली खुशबू
घटना के बाद वह खून से लथपथ वही पड़ी थी। काफी देर बाद जब मामले की जानकारी हुई तो इसकी सूचना घर सुल्तानपुर दी गयी। पिता संतोष यादव किसी तरह एक घंटे के अंदर खरौना पहुंचा और बेहोश पड़ी बिटिया को लेकर रात्रि लगभग नौ बजे सिद्धार्थ हॉस्पिटल पहुंच गया। संयोग अच्छा था कि उस समय अस्पताल के सर्जन डा0 लाल बहादुर सिद्धार्थ ऑपरेशन थियेटर में सर्जरी कर रहे थे। ओटी में एनेस्थिसिया के डा0 राजेश त्रिपाठी भी मौजूद थे। एक बार तो दो तिहाई गर्दन कटने से उसकी हालत नाजुक देख वाराणसी ले जाने की बात कहने लगे लेकिन फिर परिजन की माली हालत एवं उसकी गंभीर स्थिति देख तुरन्त भर्ती कर लिया। उस समय पल्स नहीं था। नब्ज भी नहीं चल रही थी। सारी मशल्स कट गयी थी। सिर्फ थोड़ी आँखे खुली थी। नाम-मात्र की सांस ले रही थी। उन्होंने तुरन्त ऑपरेशन कर दोनों कटी नली को ठीक कर दिया। जिससे रक्तस्राव रूक गया। फिर बाद में अपनी टीम के साथ घंटों अथक प्रयास कर अंदर से कई राउंड टांका लगाकर गला सही कर दिया। जिससे उसकी जान-जाने से बच गयी।
डॉक्टरों ने बोला - आधा घंटा भी देर होती तो नहीं बचती
इस बावत पूछे जाने पर डा0 सिद्धार्थ ने बताया कि अगर हम रिस्क न लेते तो उसकी जान किसी भी कीमत पर न बचती। क्योंकि अत्यधिक खून तो निकला ही था। जो निकल रहा था अगर वह फेफड़े में चला जाता तो नसे ब्लाक होने से उसकी सांस रूक जाती। अगर वह ज्यादा नहीं आधे घंटे भी यहां पहुंचने में लेट करती तब भी नहीं बच पाती। वाराणसी जाने में घंटों का समय लगता, जो उसके पास नहीं था। परन्तु उपचार के बाद अब पूरी तरह सांस ले रही है। पहले से ज्यादा सुधार होने पर बोल भी रही है। टांका कटने के बाद उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी जाएगी। फिलहाल वह अब पूरी तरह खतरे से बाहर है। उधर अपनी बिटिया को ठीक देख पूर्व में जिस माँ-बाप के आँखों से बह रहे आँशू रूकने का नाम नहीं ले रहे थे, वह अब खुशी के ऑशू बहा रहे है। मीडिया के समक्ष दोनों ने रूधे हुए गले से बताया कि सच है कि अगर हम यहां न आए होते तो बिटिया सदैव के लिए हम लोगों को छोड़ इस दुनिया से चली जाती। ऐसे में डाक्टर सिद्धार्थ की कितनी भी प्रंशसा की जाए वह कम है।
