उन्होंने बताया कि महाविद्यालय में ज्योतिष एवं व्याकरण विषयों की नियमित शिक्षा दी जा रही है, जहाँ दूर-दराज़ क्षेत्रों से आए आवासीय एवं स्थानीय छात्र अध्ययन कर रहे हैं। विद्यालय की स्थापना पूर्व प्रधानाचार्य एवं व्याकरणाचार्य राज नारायण मिश्र द्वारा की गई थी, जो 96 वर्ष की आयु में भी विद्यार्थियों को व्याकरण का ज्ञान दे रहे हैं।
डॉ. मिश्र ने बताया कि ज्योतिष शास्त्र को ‘ज्योति का शास्त्र’ कहा जाता है, जिसका संबंध नक्षत्रों एवं ग्रहों से है। ज्योतिष का मूल सिद्धांत यह मानता है कि आकाशीय पिंडों का प्रभाव मानव जीवन सहित संपूर्ण ब्रह्मांड पर पड़ता है। बताया कि शासन-प्रशासन द्वारा संस्कृत विद्यालयों को निरंतर सहयोग मिल रहा है। वर्तमान में यूपी बोर्ड की तर्ज पर संस्कृत विद्यालयों में विज्ञान,अंग्रेज़ी सामाजिक विज्ञान, गृह विज्ञान एवं समाजशास्त्र जैसे विषय भी पढ़ाए जा रहे हैं। साथ ही डिप्लोमा पाठ्यक्रम के अंतर्गत वेद,ज्योतिष,कर्मकांड एवं वास्तु शास्त्र की शिक्षा दी जा रही है, जिससे छात्र आत्मनिर्भर बन सकें।

