जौनपुर के महराजगंज में सचिवों का साइकिल सत्याग्रह: हाईटेक जिम्मेदारियाँ, साठ के दशक जैसी सुविधाएँ

महराजगंज (जौनपुर)। ब्लाक परिसर महराजगंज में गुरुवार को एक अलग ही तस्वीर का गवाह बना, जब ग्राम विकास अधिकारी एसोसिएशन और ग्राम पंचायत अधिकारी संघऔर पढ़ें

जौनपुर के महराजगंज में सचिवों का साइकिल सत्याग्रह: हाईटेक जिम्मेदारियाँ, साठ के दशक जैसी सुविधाएँ

महराजगंज (जौनपुर)। ब्लाक परिसर महराजगंज में गुरुवार को एक अलग ही तस्वीर का गवाह बना, जब ग्राम विकास अधिकारी एसोसिएशन और ग्राम पंचायत अधिकारी संघ के आह्वान पर सभी ग्राम सचिव विभागीय बैठक में साइकिल से पहुंचे। काली पट्टी बांधे सचिवों का यह जत्था सत्याग्रह आंदोलन के तीसरे चरण का प्रतीक बना और व्यवस्था पर मौन सवाल भी खड़ा करता दिखा—डिजिटल युग की जिम्मेदारियाँ तो दे दी गईं, पर सुविधाएँ अब भी साइकिल भत्ते तक सीमित क्यों हैं?

संजय श्रीवास्तव और विनय यादव के नेतृत्व में सचिवों ने संदेश दिया कि सरकार यदि उन्हें केवल साइकिल भत्ता ही देती है, तो अब IGRS निस्तारण, आवास सत्यापन, गौशाला निरीक्षण, पेंशन सत्यापन सहित सभी फील्ड कार्य साइकिल से ही किए जाएंगे।

जौनपुर के महराजगंज में सचिवों का साइकिल सत्याग्रह: हाईटेक जिम्मेदारियाँ, साठ के दशक जैसी सुविधाएँ

जौनपुर ग्राम विकास अधिकारी संघ के वरिष्ठ उपाध्यक्ष रह चुके संजय श्रीवास्तव ने कहा कि ऑनलाइन उपस्थिति, गैर-विभागीय कार्यों और बढ़ते फील्ड निरीक्षणों के दबाव के बीच आज भी सचिव गांव-गांव साइकिल से दौड़ लगाने को मजबूर हैं। उन्होंने बताया कि डिजिटल पोर्टल, समयबद्ध निस्तारण और 24×7 जवाबदेही की मांग के विपरीत सचिवों को फाइलें, रजिस्टर, लैपटॉप और डोंगल तक साइकिल पर ढोने पड़ते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि एडीओ-आईएसबी जैसे अधिकारियों को भी वाहन भत्ता नहीं मिलता, जबकि वे भी लगातार फील्ड में रहते हैं। इससे स्पष्ट है कि पूरी व्यवस्था जमीनी स्तर पर कार्य करने वालों की समस्याओं से आंख चुरा रही है।

जौनपुर के महराजगंज में सचिवों का साइकिल सत्याग्रह: हाईटेक जिम्मेदारियाँ, साठ के दशक जैसी सुविधाएँ

सचिवों ने कहा कि यह चरणबद्ध सत्याग्रह केवल प्रतीकात्मक नहीं, बल्कि लंबे समय से अनदेखी हो रही मांगों की अंतिम चेतावनी है। यदि शासन ने वाहन/यात्रा भत्ता, ऑनलाइन हाजिरी और गैर-विभागीय कामों के बोझ पर निर्णय नहीं लिया, तो अगले चरण में सभी सचिव अपने डोंगल ब्लॉक मुख्यालय पर जमा कर देंगे, जिससे ऑनलाइन कार्य व्यवस्था ठप हो जाएगी। ज्योति सिंह, संतोष दुबे, सुरेंद्र यादव, सत्येंद्र यादव, विकास गौतम, विकास यादव, शेष नारायण मौर्य, प्रशांत यादव, शशिकांत सोनकर, उमेंद्र यादव सहित सभी सचिवों ने इस सत्याग्रह को सामूहिक स्वर दिया।

दिनभर के फील्ड निरीक्षण, डिजिटल पोर्टलों की डेडलाइन और साइकिल की थकान के बावजूद वे अपने दायित्वों पर डटे रहे, लेकिन एक स्पष्ट संदेश दे गये कि गांव की सरकार चलाने वालों को भी सम्मानजनक कार्य-परिस्थितियां और आवश्यक सुविधाएँ मिलनी चाहिए।


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