Cough Syrup Scam: जौनपुर में 57 करोड़ के कफ सिरप कनेक्शन का पर्दाफाश

Cough Syrup Scam जौनपुर (Jaunpur Varta): जिला मुख्यालय स्थित नगर कोतवाली पुलिस ने कोडीन युक्त कफ सिरप की अवैध बिक्री और फर्जी कारोबार के आरो...

Cough Syrup Scam: जौनपुर में 57 करोड़ के कफ सिरप कनेक्शन का पर्दाफाश
Cough Syrup Scam

जौनपुर (Jaunpur Varta): जिला मुख्यालय स्थित नगर कोतवाली पुलिस ने कोडीन युक्त कफ सिरप की अवैध बिक्री और फर्जी कारोबार के आरोप में 12 मेडिकल स्टोर संचालकों तथा वाराणसी निवासी पिता-पुत्र समेत कुल 14 लोगों के खिलाफ अन्य धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की है। यह जानकारी पुलिस ने रविवार को दी। जौनपुर के पुलिस अधीक्षक (एसपी) डॉ. कौस्तुभ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है।

एसपी सिटी आयुष श्रीवास्तव के अनुसार, औषधि निरीक्षक रजत कुमार पांडेय की शिकायत पर नगर कोतवाली में धोखाधड़ी, आपराधिक षड्यंत्र और संबंधित धाराओं में प्राथमिकी दर्ज किया गया है। एफआईआर में 12 मेडिकल स्टोर मालिकों के अलावा वाराणसी के शुभम जायसवाल और उसके पिता भोला प्रसाद को भी नामजद किया गया है।

जांच में खुलासा: 37 लाख बोतलों का 57 करोड़ का काला कारोबार

औषधि विभाग द्वारा की गई जांच में सामने आया कि जिले के 12 से अधिक मेडिकल स्टोरों के माध्यम से करीब 37 लाख कफ सिरप की शीशियों का लेन-देन दिखाया गया है, जिनकी बाजार कीमत लगभग 57 करोड़ रुपये है। यह पूरा कारोबार कूटरचित दस्तावेजों और फर्जी बिलिंग के सहारे किया गया था। रिकॉर्ड में दिखाया गया कि सिरप की भारी-भरकम खेप जौनपुर से वाराणसी, आज़मगढ़, गाजीपुर और प्रतापगढ़ तक आपूर्ति की गई थी।

रांची की एक कंपनी से मंगाई जाती थीं सभी बोतलें

जांच में यह भी पता चला कि इन 37 लाख बोतलों की खरीद रांची की मेसर्स शैली ट्रेडर्स से की गई थी। फर्जी बिल और कागजों के आधार पर सिरप को कई जिलों में बेचने का दिखाया गया, जबकि वास्तव में यह दवाएं नशे के अवैध बाजार में मोटी कीमत पर बेची जा रही थीं।

गाजियाबाद में ट्रक पकड़ा गया, तभी खुली पूरी चेन

यह बड़ा नेटवर्क तब उजागर हुआ जब गाजियाबाद में कोडीन सिरप से लदा एक अवैध ट्रक पकड़ा गया। जांच में उस ट्रक का लिंक वाराणसी के रास्ते जौनपुर से जुड़ा मिला। इसी के बाद खाद्य सुरक्षा एवं औषधि विभाग ने 12 से 19 नवंबर के बीच जिले में विशेष अभियान चलाया। अभियान के दौरान कफ सिरप के इस पूरे रैकेट की परतें धीरे-धीरे खुलती चली गईं।

फर्जी खरीद-बिक्री के नाम पर करोड़ों की हेराफेरी

जांच के अनुसार, जिन मेडिकल स्टोर संचालकों पर मुकदमा दर्ज किया गया है, वे कागजों में कफ सिरप की भारी खरीद-बिक्री दिखाते थे। लेकिन हकीकत में यह दवाएं अवैध नशे की मंडी में बेची जा रही थीं। 

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