Ayodhya News: रामलला के गर्भगृह में ताजी हवा के लिए लगेगी खिड़की, सेवा-सुविधाओं में किए गए 3 बड़े बदलाव

अयोध्या। रामनगरी में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में पांच वर्ष के बाल रूप में प्रतिष्ठित प्रभु श्रीरामलला की नित्य सेवा, सुविधा और सुरक्षा व्यवस्...

Ayodhya News: Window to be installed in Ram Lalla's sanctum sanctorum for fresh air; 3 major changes made to amenities and services.

अयोध्या।
रामनगरी में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में पांच वर्ष के बाल रूप में प्रतिष्ठित प्रभु श्रीरामलला की नित्य सेवा, सुविधा और सुरक्षा व्यवस्थाओं को और अधिक सुदृढ़ व आत्मीय बनाने के लिए श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने कई महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। ट्रस्ट में नए पदाधिकारियों के पदभार संभालने के बाद बाल प्रभु के दैनिक सत्कार और अर्चकों की सेवा पद्धति को पारंपरिक व शास्त्रीय मर्यादाओं के अनुसार नया स्वरूप दिया जा रहा है।

बाल स्वरूप भगवान को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए गर्भगृह में विशेष वेंटिलेशन व्यवस्था करने का निर्णय लिया गया है। रात्रि विश्राम (शयन) के समय जब गर्भगृह के मुख्य कपाट बंद कर दिए जाते हैं, तब प्रभु को किसी प्रकार की घुटन न हो, इसके लिए गर्भगृह में एक विशेष खिड़की स्थापित करने पर विचार किया जा रहा है, ताकि शुद्ध एवं ताजी वायु का प्रवाह निरंतर बना रहे। धार्मिक समिति के सदस्य स्वामी राजकुमार दास के परामर्श पर ट्रस्ट के महासचिव स्वामी गोविंद देव गिरि ने आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए हैं तथा ट्रस्ट के सहयोगी जगदीश आफले को इस कार्य को धरातल पर उतारने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

साथ ही प्रभु की नित्य सेवा और पूजन को और अधिक भक्तिमय बना दिया गया है। बीते 5 सितंबर से लागू नई व्यवस्था के तहत अब प्रभु रामलला को प्रातः जगाने, भोग अर्पित करने से लेकर रात्रि शयन आरती तक विभिन्न अवसरों पर विशेष पारंपरिक भक्ति पदों और भजनों का सस्वर गायन किया जा रहा है। पुजारियों द्वारा बाल प्रभु को अत्यंत वात्सल्य और दुलार के साथ पदों के माध्यम से जगाया और सुलाया जा रहा है।

तीसरे बड़े बदलाव के तहत मंदिर के पुजारियों का नया ड्रेस कोड श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन पर्व से विधिवत प्रभावी कर दिया गया है। पूर्व में पहनी जाने वाली चौबंदी व्यवस्था को समाप्त कर अब शास्त्रीय मर्यादा के अनुकूल पुजारियों के लिए पीले रंग का रेशमी अचला (धोती) और उत्तरीय (कंधे पर लपेटे जाने वाला दुपट्टा) अनिवार्य कर दिया गया है जिससे गर्भगृह की पारंपरिक और आध्यात्मिक आभा और अधिक भव्य नजर आ रही है।

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