जौनपुर जिले में पानी से भरे बोरिंग के गड्ढे में डूबने से दो मासूम बच्चों की मौत, सबमर्सिबल के लिए खोदा गया था गड्ढा
बारिश से गड्ढा बना दलदल
मिली जानकारी के मुताबिक, गांव निवासी छोटेलाल गौतम उर्फ पप्पू गौतम ने मंगलवार को सबमर्सिबल लगाने के लिए बोरिंग कराई थी। बोरिंग के दौरान खोदा गया गड्ढा बिना किसी सुरक्षा व्यवस्था के खुला छोड़ दिया गया। लगातार बारिश के कारण उसमें पानी भर गया और वह दलदल जैसा हो गया।
खेलते-खेलते गड्ढे में गिरे दोनों बच्चे, हुई मौत
बता दे कि, बुधवार दोपहर गांव के अधिकांश लोग धान की रोपाई में व्यस्त थे। इसी दौरान अनिल बिंद का पांच वर्षीय बेटा आरव और वीरेंद्र बिंद का छह वर्षीय बेटा शिवा अपनी माँ के पीछे खेत तक पहुंचे थे। कुछ देर बाद आरव और शिवा अकेले घर लौटने लगे। रास्ते में पानी से भरे गड्ढे के पास खेलते समय उनका पैर फिसल गया और दोनों गहरे पानी मे गिर पड़े। आसपास कोई मौजूद न होने के कारण समय पर दोनों बच्चों को बचाया नहीं जा सका।
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| परिवार मे मातम |
जब काफी देर तक दोनों बच्चे घर नहीं पहुंचे तो परिजनों ने उनकी तलाश शुरू की। घर से करीब 100 मीटर दूर स्थित उसी गड्ढे में दोनों बच्चे मिले। ग्रामीणों ने तत्काल उन्हें बाहर निकालकर पहले कटवार बाजार के एक निजी अस्पताल पहुंचाया। वहां से गंभीर हालत देखते हुए उन्हें भदोही जिले के सुरियावां अस्पताल रेफर किया गया, जहां चिकित्सकों ने जांच के बाद दोनों को मृत घोषित कर दिया।
हादसे की सूचना पर पहुंचा प्रशासन, परिजनों को सहायता का दिया आश्वासन
घटना के बाद ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि यदि बोरिंग के लिए खोदे गए गड्ढे की समय रहते घेराबंदी कर दी जाती या उसे ढक दिया जाता, तो यह हादसा नहीं होता। लगातार बारिश के बावजूद वहां किसी प्रकार की सुरक्षा व्यवस्था नहीं की गई थी।
हादसे की सूचना मिलते ही बरसठी थाना प्रभारी जय प्रकाश यादव पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे। इसके अलावा क्षेत्राधिकारी मड़ियाहूं, उपजिलाधिकारी नवीन कुमार, तहसीलदार रवि रंजन, लेखपाल और राजस्व विभाग की टीम ने भी घटनास्थल का निरीक्षण किया। तहसीलदार रवि रंजन ने बताया कि दोनों मृतक बच्चों के परिवारों को आपदा राहत मद से चार-चार लाख रुपये की आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। पुलिस ने दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और मामले में आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
दर्दनाक हादसे के बाद दोनों परिवारों सहित पूरे गांव में मातम
आरव अपने माता-पिता का इकलौता बेटा था, जबकि शिवा के पिता वीरेंद्र बिंद वाराणसी में मेहनत-मजदूरी कर परिवार का पालन-पोषण करते हैं। बेटे की मौत की सूचना मिलते ही वह गांव पहुंचे। इस दर्दनाक हादसे के बाद दोनों परिवारों सहित पूरे गांव में मातम पसरा हुआ है।
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