Jaunpur News: 50 हजार रुपये मांगने का आरोप, पांच ट्रकों के साथ एआरटीओ कार्यालय पहुंचा वाहन मालिक
वाहन मालिक ने रजिस्ट्रेशन बाबू पर 50 हजार रुपये रिश्वत मांगने का गंभीर आरोप लगाया। उसका कहना है कि रिश्वत नहीं देने के कारण पिछले एक सप्ताह से उसके ट्रकों का रजिस्ट्रेशन जानबूझकर लटकाया जा रहा था।
वाहन मालिक ने लगाया 50 हजार रुपये रिश्वत मांगने का आरोप
वाहन मालिक एवं मड़ियाहूं कस्बे के निवासी विनय सिंह का आरोप है कि उसने अपने पांचों ट्रकों के रजिस्ट्रेशन के लिए नियमानुसार आवेदन करने के साथ जरूरी दस्तावेज भी जमा कर दिए थे। इसके बावजूद करीब एक सप्ताह बीत जाने के बाद भी रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया पूरी नहीं की गई।
विनय सिंह का आरोप है कि कार्यालय में तैनात रजिस्ट्रेशन बाबू गणेशदत्त द्वारा कथित तौर पर प्रत्येक काम को आगे बढ़ाने के लिए 50 हजार रुपये की मांग की जा रही थी। वाहन मालिक का कहना है कि रिश्वत देने से इनकार करने के बाद उसकी फाइल को लगातार टाला जाता रहा।
पांच ट्रक कार्यालय के सामने खड़े होने से लगी भीड़
मामला उस समय और गरमा गया, जब शिकायतकर्ता अपने पांचों ट्रकों को लेकर सीधे एआरटीओ कार्यालय के सामने पहुंच गया और उन्हें सड़क पर खड़ा कर दिया। एक साथ पांच ट्रकों के खड़े होने से देखते ही देखते जाम की स्थिति बन गई। मौके पर लोगों की भीड़ जुट गई और कार्यालय परिसर में भी इसकी चर्चा तेज हो गई।
खास बात यह रही कि जिस रजिस्ट्रेशन बाबू गणेशदत्त पर रिश्वत मांगने का आरोप लगाया गया, वह मौके पर मौजूद नहीं थे। इसके अलावा एआरटीओ भी कार्यालय में मौजूद नहीं मिले। ऐसे में शिकायतकर्ता के आरोपों को लेकर अधिकारियों की ओर से तत्काल मौके पर कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिल सका।
आरआई ने कहा- बाबू हाईकोर्ट और एआरटीओ लखनऊ गए
मामले में जब आरआई से जानकारी ली गई तो उन्होंने बताया कि संबंधित बाबू गणेशदत्त हाईकोर्ट गए हैं, जबकि एआरटीओ साहब लखनऊ गए हुए हैं। हालांकि, वाहन मालिक द्वारा लगाए गए रिश्वत के आरोपों की वास्तविकता क्या है, यह जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
पांच ट्रकों को कार्यालय के सामने खड़ा किए जाने और जाम की स्थिति बनने के बाद विभाग में हलचल बढ़ गई। मामला तूल पकड़ने पर आनन-फानन में वाहन मालिक की रजिस्ट्रेशन संबंधी फाइल दूसरे बाबू को सौंप दी गई। इसके बाद रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया आगे बढ़ाने की कवायद शुरू हुई।
फिलहाल एआरटीओ कार्यालय के सामने पांच ट्रकों को खड़ा किए जाने की घटना ने विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। वाहन मालिक द्वारा लगाए गए 50 हजार रुपये की कथित रिश्वत मांगने के आरोप की निष्पक्ष जांच के बाद ही पूरे मामले की वास्तविकता सामने आ सकेगी।
.webp)