Aja ekadashi: भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अजा एकादशी व्रत एवं पारण कब करें
Aja ekadashi: ज्योतिषशास्त्र एवं वैदिक पंचांग के अनुसार भाद्रपद कृष्ण पक्ष 7 सितंबर को अजा एकादशी व्रत शास्त्रोक्त है। वैदिक पंचांग के गणना...
Aja ekadashi: ज्योतिषशास्त्र एवं वैदिक पंचांग के अनुसार भाद्रपद कृष्ण पक्ष 7 सितंबर को अजा एकादशी व्रत शास्त्रोक्त है। वैदिक पंचांग के गणना के अनुसार एकादशी तिथि 6 सितंबर की सायं 7 बजकर 30 मिनट बजे से 7 सितंबर की सायं 5 बजकर 4 मिनट बजे तक रहेगी। सूर्योदय अनुसार उदयातिथि 7 सितंबर को प्राप्त हो रहा है। अतः अजा एकादशी 7 सितम्बर दिन सोमवार को व्रत रखा जाएगा और 8 सितंबर दिन मंगलवार को सूर्योदय के उपरांत अन्न का दान कर व्रत का द्वादशी में पारण करें।
अजा एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित अत्यन्त महत्वपूर्ण एकादशी मानी जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस व्रत से पापों के क्षय, मानसिक शुद्धि, भगवान विष्णु की कृपा और आध्यात्मिक उन्नति की कामना की जाती है। इस व्रत का संबंध विशेष रूप से सत्य, धर्म, धैर्य और विपरीत परिस्थितियों में भगवान पर विश्वास से जोड़ा जाता है। पौराणिक परंपरा में अजा एकादशी की कथा राजा हरिश्चंद्र से जुड़ी है। राजा हरिश्चंद्र सत्य और धर्म के लिए प्रसिद्ध थे लेकिन उन्हें अत्यंत कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा। परिवार और राज्य से जुड़े अनेक कष्टों के बावजूद उन्होंने सत्य का मार्ग नहीं छोड़ा। कथा के अनुसार ऋषि के मार्गदर्शन से उन्होंने अजा एकादशी का व्रत और भगवान विष्णु की आराधना किया। व्रत के प्रभाव और भगवान की कृपा से उनके जीवन के संकट दूर हुए और उन्हें पुनः सुख-समृद्धि प्राप्त हुई। कठिन परिस्थितियों में भी सत्य, धर्म, धैर्य और ईश्वर-भक्ति का त्याग नहीं करना चाहिए।
प्रातःकाल ब्रह्ममुहूर्त या सूर्योदय के आस-पास उठें। स्नान करके स्वच्छ पीले या सफेद वस्त्र धारण करें। दीपक और धूप जलाएं। भगवान को पीले फूल, तुलसी दल और फल अर्पित करें। नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जाप करें !कम से कम १०८ बार जाप करना विशेष रूप से अच्छा माना जाता है। इसके बाद विष्णु सहस्रनाम, श्रीहरि स्तुति अथवा गीता का पाठ करें।भगवान विष्णु की पूजा में तुलसी दल का विशेष महत्व माना जाता है। पूजा में तुलसी दल अर्पित करें।
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