Chitrakoot News: सामाजिक संगठनों का बाढ़ पीड़ितों के लिये राहत अभियान जारी
चित्रकूट। मंदाकिनी नदी में आई बाढ़ से प्रभावित परिवारों की मदद के लिए सामाजिक संगठनों और स्वयंसेवी संस्थाओं ने राहत कार्य तेज कर दिए हैं। इसी के तहत श्री सद्गुरु सेवा संघ ट्रस्ट, रघुवीर मंदिर ट्रस्ट, इंडियन रेडक्रॉस सोसाइटी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवक प्रभावित क्षेत्रों में सेवा कार्य कर रहे हैं। संत रणछोड़ दास महाराज द्वारा संस्थापित श्री सद्गुरु सेवा संघ ट्रस्ट एवं रघुवीर मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष विशद भाई मफत लाल ने बाढ़ प्रभावितों की सहायता के लिए 51 लाख रुपये की धनराशि से राहत सामग्री उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है। ट्रस्ट की ओर से सतना जिला प्रशासन को संकल्प पत्र सौंपकर इसकी जानकारी दी गई।
ट्रस्ट के ट्रस्टी एवं निदेशक डॉ. इलेश जैन ने बताया कि 4 दिनों से टीम बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में लंच पैकेट, राशन किट, दवाएं, हाइजीन किट, कपड़े, शुद्ध पेयजल, कंबल, पन्नी, मोमबत्ती और माचिस जैसी आवश्यक सामग्री पहुंचा रही है। बच्चों, महिलाओं और पुरुषों के लिए कपड़े भी वितरित किए जाएंगे। इसी प्रकार इंडियन रेडक्रॉस सोसाइटी की चित्रकूट शाखा ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य शिविर लगाकर लोगों का परीक्षण किया और निःशुल्क दवाएं वितरित कीं। चिकित्सकीय टीम का नेतृत्व डॉ. शिवेंद्र नारायण मिश्रा ने किया। सचिव विजय किशोर ने बताया कि स्वयंसेवक और मेडिकल टीम राहत एवं बचाव कार्य में लगातार जुटे हैं।
सभापति आशीष सिंह, श्याम सिंह परिहार, हरि मिश्रा, सोनू खंगार, अमन, शिवेंद्र सहित संस्था के पदाधिकारियों और स्वयंसेवकों ने प्रभावित लोगों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाईं। इसके अलावा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवक भी बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं सेवा कार्यों में जुटे हैं। संघ के विभाग प्रचार प्रमुख श्याम सुंदर मिश्रा ने बताया कि स्वयंसेवकों द्वारा जरूरतमंद परिवारों तक भोजन के पैकेट, पेयजल और आवश्यक सामग्री पहुंचाई जा रही है। प्रभावित लोगों की जरूरतों की जानकारी लेकर उन्हें यथासंभव सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। स्वयंसेवक स्थानीय समाज और प्रशासन के साथ समन्वय बनाकर राहत कार्यों में सहयोग कर रहे हैं। बाढ़ का पानी कम होने के बाद स्वच्छता और साफ-सफाई के कार्यों में भी सहयोग किया जाएगा। संकट की इस घड़ी में संघ के स्वयंसेवक सेवा, सहयोग और संवेदना के साथ प्रभावित परिवारों के बीच निरंतर सक्रिय हैं।
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