वायरल वीडियो के बाद भी नहीं बदली सोनू चौहान की जिंदगी, बोले- बहन को पढ़ाना है, PM-CM से मदद की अपील

Sonu Chauhan Jaunpur

Jaunpur News: बीते दिनों आपने सोशल मीडिया और मीडिया पर एक वीडियो जरूर देखा होगा, जो जौनपुर ही नहीं बल्कि पूरे प्रदेश में तेजी से वायरल हुआ था। यह वीडियो था सोनू चौहान का।

सोनू चौहान जौनपुर जिला मुख्यालय से करीब छह किलोमीटर दूर स्थित जमैथा गांव के रहने वाले हैं। सोनू साइकिल से कचहरी आते थे और वहां झालमूड़ी बेचकर अपने परिवार का खर्च चलाने के साथ-साथ अपनी छोटी बहन की पढ़ाई में मदद करते थे। सोनू की आर्थिक स्थिति बेहद खराब है। उम्र महज करीब 12 साल है, लेकिन जिम्मेदारियां बहुत बड़ी हैं। छोटी उम्र में ही सोनू अपनी बहन के भविष्य की जिम्मेदारी उठाने की कोशिश कर रहे हैं।

परिवार की जिम्मेदारी छोटी उम्र में सोनू के कंधों पर

सोनू के नाना-नानी भी हैं और उनके पिता भी हैं, लेकिन सोनू का कहना है कि उनके पिता अब सोनू और उनकी छोटी बहन की देखरेख नहीं करते हैं। सोनू की मां का निधन हो चुका है और उनके पिता ने दूसरी शादी कर ली है। ऐसे में सोनू और उनकी छोटी बहन के सामने जीवन की कई मुश्किलें खड़ी हो गई हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति भी ठीक नहीं है। यही वजह है कि इतनी कम उम्र में सोनू को अपने और अपनी छोटी बहन के भविष्य की चिंता करनी पड़ रही है। सोनू मेहनत करके कुछ पैसे कमाना चाहते हैं, ताकि अपनी बहन की पढ़ाई जारी रख सकें और दोनों का खर्च चला सकें।

वायरल वीडियो से क्या बदला?

सोनू का वीडियो वायरल होने के बाद कई लोगों ने उनकी मदद करने की बात कही। कुछ लोगों ने सुविधाएं दिलाने और उनकी बहन की पढ़ाई में मदद करने का भरोसा भी दिया। लेकिन सोनू का कहना है कि उनकी आर्थिक स्थिति में अभी तक कोई खास बदलाव नहीं आया है। सोनू ने बताया कि उनके पिता उनकी और उनकी छोटी बहन की आर्थिक मदद नहीं करते हैं। उनकी मां का निधन हो चुका है और पिता ने दूसरी शादी कर ली है। 

मेरे नाम पर लगाए गए बारकोड से मुझे एक रुपया भी नहीं मिला

सोनू ने पत्रकार से बातचीत के दौरान एक गंभीर बात बताई कि सोशल मीडिया पर उनकी मदद के नाम पर कई लोगों ने अपने-अपने बारकोड लगाकर पैसे लेने की अपील की, लेकिन उन पैसों में से उन्हें कुछ भी नहीं मिला। सोनू ने लोगों से अपील करते हुए कहा कि अगर कोई उनकी मदद करना चाहता है तो गलत बारकोड पर पैसा न भेजे। उन्होंने कहा कि वह अपनी छोटी बहन को पढ़ाना चाहते हैं और अपने पैरों पर खड़ा होना चाहते हैं। इसके लिए वह एक छोटी सी दुकान या गुमटी खोलना चाहते हैं, जिससे वह खुद और अपनी बहन का खर्च चला सकें।

पहले दो वक्त की रोटी और फिर बहन की पढ़ाई

सोनू का कहना है कि अगर उन्हें आर्थिक मदद मिलती है तो वह सबसे पहले अपने लिए एक छोटी सी दुकान शुरू करना चाहते हैं। इसके बाद अपनी बहन की पढ़ाई, किताब-कॉपी और रोजमर्रा की जरूरतों का खर्च उठाना चाहते हैं। सोनू ने कहा कि वह नहीं चाहते कि भविष्य में उन्हें और उनकी बहन को किसी के सामने हाथ फैलाना पड़े। वह मेहनत करके अपने पैरों पर खड़ा होना चाहते हैं और अपनी छोटी बहन को पढ़ाकर उसका भविष्य बेहतर बनाना चाहते हैं।

अब झालमूड़ी भी नहीं बेच पा रहे सोनू

सोनू ने बताया कि फिलहाल वह झालमूड़ी भी नहीं बेच रहे हैं। उनका कहना है कि कुछ लोगों ने उन्हें कचहरी में झालमूड़ी बेचने से मना किया है। अधिकारियों की तरफ से भी उन्हें फिलहाल ऐसा करने से रोकने की बात सामने आई है। अब स्थिति यह है कि सोनू पिछले कई दिनों से घर पर बैठे हैं। कभी कोई छोटा-मोटा काम मिल जाता है तो 100-150 रुपये कमा लेते हैं, लेकिन नियमित रोजगार नहीं है। सोनू कहते हैं कि जब आमदनी ही नहीं होगी तो अपनी बहन की पढ़ाई और घर का खर्च कैसे चलेगा? उनका कहना है कि वह किसी पर हमेशा निर्भर नहीं रहना चाहते, बल्कि मेहनत करके अपनी और अपनी बहन की जिंदगी बदलना चाहते हैं।

SONU

पंकज जी की मदद को सोनू ने बताया सबसे बड़ा सहारा

सोनू ने बताया कि पंकज जी नाम के एक समाजसेवी ने उनकी काफी मदद की है। उन्होंने सोनू को साइकिल दी, उनकी बहन की पढ़ाई के लिए कॉपी-किताब और दूसरी जरूरी चीजें उपलब्ध कराईं। सोनू का कहना है कि पंकज जी ने वास्तव में उनकी मदद की, जबकि कई अन्य लोगों ने सिर्फ मदद का भरोसा दिया लेकिन बाद में कोई सहयोग नहीं किया। 

Narendra Modi & Yogi Aditynath

सोनू की मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री से अपील

सोनू ने प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मदद की अपील की है। उन्होंने कहा कि उनका आधार कार्ड बनवा दिया जाए और रोजगार के लिए एक छोटी सी गुमटी या दुकान उपलब्ध करा दी जाए, ताकि वह मेहनत करके अपने और अपनी छोटी बहन का खर्च चला सकें। उनका कहना है कि अगर उन्हें रोजगार का एक साधन मिल जाता है तो वह नियमित रूप से कमाई कर सकेंगे और अपनी बहन की पढ़ाई भी जारी रख पाएंगे।

सोनू का कहना है कि उनकी सबसे बड़ी चिंता अपनी छोटी बहन की पढ़ाई और भविष्य को लेकर है। वह चाहते हैं कि बहन को अच्छी शिक्षा मिले, उसकी किताब-कॉपी और पढ़ाई का खर्च निकल सके और उसे आगे बढ़ने का मौका मिले। इसके लिए वह खुद मेहनत करके कमाना चाहते हैं, ताकि बहन की पढ़ाई किसी भी स्थिति में न रुके।

छोटी उम्र, लेकिन बड़ी जिम्मेदारी

सोनू की कहानी सिर्फ आर्थिक परेशानी की कहानी नहीं है, बल्कि यह एक ऐसे बच्चे की कहानी है जो खुद मुश्किलों में होने के बावजूद अपनी छोटी बहन का भविष्य संवारना चाहता है। जिस उम्र में बच्चों के हाथों में किताबें और खिलौने होने चाहिए, उस उम्र में सोनू अपने परिवार की जिम्मेदारियों के बारे में सोच रहे हैं। वह अपनी छोटी बहन की पढ़ाई रुकने नहीं देना चाहते और इसके लिए मेहनत करके कमाई करना चाहते हैं।

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