15 वर्ष की उम्र में शुरू हुई शिव साधना, 44वें वर्ष भी मलमास में मौन तपस्या में लीन हैं रामजतन यादव
रामजतन यादव के पुत्र हरिकिशन ने बताया कि पिता जी 15 वर्ष की आयु में भगवान भोलेनाथ की आराधना का संकल्प लिया था। तभी से प्रत्येक मलमास में पूरे एक माह यानी तीस दिनों तक मौन व्रत रखकर शिव साधना करते हैं। एक माह की साधना अवधि में वह घर की एक सुनसान कोठरी में एकांतवास करते हैं और अपना अधिकांश समय जप, तप, ध्यान तथा भगवान शिव के पूजन-अर्चन में व्यतीत करते हैं।
विशेष बात यह है कि इस दौरान वह अन्न का पूर्ण त्याग कर देते हैं। केवल फल, दूध एवं अन्य पेय पदार्थों का अल्पाहार ग्रहण करते हैं। पूरे मलमास तक उनका मौन व्रत इतना कठोर होता है कि किसी भी परिस्थिति में उनकी जुबान नहीं खुलती। परिवार के सदस्य भी उनसे बहुत ही आवश्यक संवाद पत्र के माध्यम से ही कर पाते हैं।
बचपन से ही धोती, कुर्ता और जैकेट जैसे पारंपरिक हिंदू वेशभूषा में रहने वाले रामजतन यादव का भगवान भोलेनाथ पर अटूट विश्वास है। उनका कहना है कि शिव आराधना से उन्हें मानसिक शांति आत्मबल और समाजसेवा की प्रेरणा मिलती है।
गांव के लोगों के अनुसार रामजतन यादव लगातार पांच पंचवर्षीय कार्यकाल तक ग्राम प्रधान रह चुके हैं और वर्तमान में क्षेत्र पंचायत सदस्य( बीडीसी ) हैं। सामाजिक और राजनीतिक जीवन में सक्रिय रहने के बावजूद मलमास की साधना में उन्होंने कभी व्यवधान नहीं आने दिया।
ग्रामीणों का मानना है कि आधुनिक दौर में 44 वर्षों तक लगातार एक माह का मौन व्रत, अन्न त्याग और एकांत साधना अपने आप में दुर्लभ उदाहरण है। रामजतन यादव की शिवभक्ति क्षेत्र में श्रद्धा और प्रेरणा का विषय बनी हुई है।मौजूदा समय एकांतवास में मौनब्रत शिव साधना में लीन है।
.webp)